वह परेशान नहीं है। उसका दिमाग़ रुकता नहीं है।

gifted बच्चे हर चीज़ पर इतना क्यों सोचते हैं — और कब यह सोचना नुक़सान करने लगता है

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gifted — यानी वह बच्चा जिसका दिमाग़ औसत से अलग तरीक़े से काम करता है। यह अच्छे marks लाने वाला बच्चा नहीं है — यह सोचने का एक अलग तरीक़ा है।

GiftedKids.in की ओर से

रात दस बजे बत्ती बंद होती है और सवाल शुरू हो जाते हैं। मरने के बाद क्या होता है। अगर वक़्त कभी ख़त्म नहीं होता तो कहाँ जाता है। और सुबह उठते ही वह कल की एक बात सोच रहा होता है — कहीं उसने किसी दोस्त का दिल दुखा दिया हो। घर में इसका एक ही नाम मिलता है — tension। और वहीं से समझ ग़लत दिशा में मुड़ जाती है।

यह लेख GiftedKids.in ने भारतीय परिवारों के लिए लिखा है — किसी अंग्रेज़ी लेख का अनुवाद नहीं। इसका आधार Dr Inderbir Kaur Sandhu, PhD (Cambridge) का clinical काम है, जो भारत के बाहर की practice से आता है। भारतीय school, marks और परिवार का संदर्भ GiftedKids.in का अपना है। पूरा विवरण · उनका मूल अंग्रेज़ी लेख यहाँ

"इसका दिमाग़ बंद ही नहीं होता"

एक माँ मुस्कुराते हुए कमरे में आईं और बोलीं — "मुझे लगता है मेरा बेटा थका हुआ है, क्योंकि वह अपना दिमाग़ कभी बंद ही नहीं करता।"

उन्होंने बताया कि सोने का वक़्त शांत कभी नहीं होता। एक साधारण goodnight तीस मिनट के सवालों में बदल जाता है — "मरने के बाद क्या होता है?", "क्या कहीं मेरा एक और version हो सकता है?", "अगर वक़्त कभी ख़त्म नहीं होता, तो वह जाता कहाँ है?" और सुबह तक वह कल की बातचीत का विश्लेषण कर रहा होता है, यह सोचते हुए कि कहीं उसने किसी दोस्त को दुखी न कर दिया हो।

बरसों में यह साफ़ हुआ है कि ऐसे बच्चे सिर्फ़ ज़्यादा नहीं सोचते — वे अलग तरह से सोचते हैं। उनका दिमाग़ अपने आप जोड़ बनाता है, संभावनाएँ खोजता है, और गहरा अर्थ ढूँढ़ता है।

यह बच्चे में कोई कमी नहीं है। उसका दिमाग़ इसी तरह बना है। मुश्किल — और कला — यह है कि उसे उस दिमाग़ के भीतर आराम से रहना सिखाया जाए।

ऐसा क्यों होता है

शोध बताता है कि तेज़ तर्क क्षमता के कारण ऐसे बच्चे अपनी उम्र से पहले अमूर्त (abstract) सोचने लगते हैं। वे वे सवाल पूछते हैं जो आमतौर पर बहुत बड़े बच्चे पूछते हैं।

psychologist Kazimierz Dabrowski ने इसे intellectual overexcitability कहा — विश्लेषण करने, सवाल करने और समझने की असामान्य रूप से तीव्र इच्छा।

रोज़ की ज़िंदगी में इसका मतलब यह है कि कोई भी छोटी बात छोटी नहीं रहती। दोस्त से हुई नाराज़ी न्याय-अन्याय की बहस बन जाती है। एक science documentary black holes पर पूरी शाम खोजने में बदल जाती है। और छुट्टी पर जाने से पहले ही भूगोल, इतिहास और संस्कृति के सवाल शुरू हो जाते हैं — bag पैक होने से भी पहले।

भारत में इसे tension कह दिया जाता है

यह हिस्सा GiftedKids.in का अपना है।

हमारे यहाँ बच्चे के भीतर चल रही किसी भी हलचल के लिए एक ही शब्द उपलब्ध है — tension। और चूँकि tension एक बुरी चीज़ मानी जाती है, इसलिए बच्चे का सोचना भी एक समस्या बन जाता है जिसे रोकना है।

रात को सुनाई देता है — "सो जा, सुबह school है।" यह ग़लत नहीं है, लेकिन बच्चे के लिए इसका मतलब यह होता है कि उसके सवाल असुविधा हैं।

"इतना मत सोचो" कहना उस बच्चे से यह कहने जैसा है जिसे संगीत सुनाई देता है — कि धुनें सुनना बंद कर दो। वह ऐसा कर नहीं सकता। उसे तरीक़ा चाहिए, रोक नहीं।

exam का मौसम इसे कई गुना कर देता है। जहाँ हर test को "career तय करने वाला" बताया जाता है, वहाँ एक ऐसा दिमाग़ जो हर संभावना गिन सकता है, हर संभावित नाकामी भी गिन लेता है। और घर में कोई कह देता है — "इतना सोचता है, नज़र लग जाएगी।"

इन दोनों बातों में एक ही ग़लती है: यह मान लेना कि सोचना दुश्मन है।

assessment room में जो दिखता है

माता-पिता शुरू में यही डरते हैं कि लगातार सोचने का मतलब बच्चे को anxiety है। कभी-कभी anxiety होती भी है। लेकिन अक्सर यह सिर्फ़ उस दिमाग़ का काम करने का तरीक़ा होता है।

assessment के दौरान ऐसे बच्चे दिखते हैं जो किसी puzzle के बारे में सोचते रहते हैं, जबकि हम आगे बढ़ चुके होते हैं। कुछ पूछते हैं कि क्या कोई दूसरा जवाब भी हो सकता था। कुछ उसी सवाल से बिलकुल नए सवाल बना लेते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि ऐसे बच्चे अक्सर बहुत रचनात्मक होते हैं। असंबंधित चीज़ों को जोड़ने की उनकी क्षमता उन्हें मौलिक हल तक पहुँचाती है।

असली काम यह है कि उन्हें यह समझ आए — कब सोचते रहना है, और कब किसी विचार को आराम देना सेहतमंद है।

कब ध्यान देना ज़रूरी है

अगर सोचना नींद, दोस्ती, फ़ैसले लेने या रोज़ की ख़ुशी में रुकावट बनने लगे, तो ध्यान दें। कुछ बच्चे "perfect" फ़ैसला लेने की कोशिश में फँस जाते हैं। कुछ बातचीत को बार-बार दोहराते हैं, यह सोचते हुए कि उन्होंने ठीक कहा या नहीं। कुछ कोई काम शुरू ही नहीं करते, क्योंकि उन्होंने पहले ही सब कुछ ग़लत होते हुए सोच लिया है।

इन बातों पर आलोचना की ज़रूरत नहीं है, समझ की ज़रूरत है।

घर में क्या बदला जा सकता है

एक परिवार ने घर में "सवाल पेटी" बना ली। दिन भर बेटी अपने दिलचस्प सवाल लिखकर उसमें डालती रही। हर रविवार शाम परिवार एक-दो सवाल चुनकर उन पर मिलकर बात करता। उन्होंने उसकी जिज्ञासा दबाई नहीं — उसे एक सेहतमंद ढाँचा दे दिया।

एक आम ग़लती

बहुत से समझदार बड़े यह मान लेते हैं कि जो बच्चा परिपक्व सवाल पूछता है, उसमें जवाब सँभालने की भावनात्मक परिपक्वता भी होगी।

असल में तेज़ सोच और भावनात्मक विकास एक ही रफ़्तार से नहीं चलते। बच्चा दुनिया के जटिल मुद्दों को दिमाग़ से समझ सकता है, और भावनाओं में अपनी ही उम्र का बना रहता है।

भ्रम

gifted बच्चे ज़्यादा सोचते हैं क्योंकि वे ज़्यादा चिंता करते हैं।

हक़ीक़त

बहुत से इसलिए ज़्यादा सोचते हैं क्योंकि उनका दिमाग़ स्वभाव से pattern, वजह और संभावनाएँ खोजता है। मक़सद उनका सोचना रोकना नहीं है — उसे समझदारी से सँभालना सिखाना है।

GiftedKids.in की बात

इस काम से एक बात साफ़ होती है — जिज्ञासा और ज़्यादा सोचना अक्सर साथ-साथ चलते हैं। जो दिमाग़ नई चीज़ें गढ़ता है, सवाल करता है और कल्पना करता है, वही अपने ही विचारों के बोझ में दब भी सकता है।

हमारा काम उस असाधारण दिमाग़ को चुप कराना नहीं है। हमारा काम बच्चे को यह पहचानना सिखाना है कि कब सोचना उसे बढ़ा रहा है, और कब रुककर, आराम करके, बस बच्चा बने रहने का वक़्त है।

जिस दिन यह संतुलन समझ आ जाता है, हम सिर्फ़ giftedness नहीं सँवार रहे होते — हम पूरी ज़िंदगी की सेहत सँवार रहे होते हैं।

एक बाहरी आयोजन में बच्चे — एक लड़की और एक लड़का — किसी costume वाले किरदार से खुश होकर मिल रहे हैं

और गहराई से पढ़ने के लिए

ये सब अंग्रेज़ी में हैं। gifted education पर भरोसेमंद हिंदी सामग्री लगभग नहीं है — यही एक वजह है कि यह site बन रही है।

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