gifted बच्चों में भावनाओं की तीव्रता — और “मज़बूत बनो” कहना क्यों उलटा पड़ता है
होम › हिंदी लेख › वह कमज़ोर नहीं है। उसे हर चीज़ ज़्यादा महसूस होती है।
gifted — यानी वह बच्चा जिसका दिमाग़ औसत से अलग तरीक़े से काम करता है। यह अच्छे marks लाने वाला बच्चा नहीं है — यह सोचने और महसूस करने का एक अलग तरीक़ा है।
GiftedKids.in की ओर से
एक वाक्य है जो लगभग हर भारतीय बच्चे ने सुना है, और वह आमतौर पर माता-पिता से नहीं, किसी रिश्तेदार से आता है — “इतनी सी बात पर रो रहा है?” और अगर बच्चा लड़का है, तो उसके पीछे-पीछे दूसरा वाक्य आता है, जो इससे भी ज़्यादा नुक़सान करता है क्योंकि वह प्यार से कहा जाता है — “लड़के रोते नहीं।”
यह लेख GiftedKids.in ने भारतीय परिवारों के लिए लिखा है — किसी अंग्रेज़ी लेख का अनुवाद नहीं। इसका आधार Dr Inderbir Kaur Sandhu, PhD (Cambridge) का clinical काम है, जो भारत के बाहर की practice से आता है। भारतीय school, marks और परिवार का संदर्भ GiftedKids.in का अपना है। पूरा विवरण · उनका मूल अंग्रेज़ी लेख यहाँ।
माता-पिता अक्सर यह बताते हैं — जो बात दूसरे बच्चे झटककर आगे बढ़ जाते हैं, उस पर उनका बच्चा रो देता है। एक छोटी निराशा पूरा दिन ख़राब कर देती है।
और वही बच्चा किसी नए idea या किसी की छोटी सी भलाई पर इतना ख़ुश हो जाता है कि देखने वाले को हैरानी होती है।
ये दो अलग बातें नहीं हैं। दोनों एक ही वजह से होती हैं।
ऐसे बच्चे भावनाओं को गहराई से जीते हैं। अन्याय, आलोचना, निराशा — और कई बार news में सुनी हुई बातें भी — उन्हें ज़ोर से लगती हैं।
लेकिन इसका दूसरा पहलू भी उतना ही तेज़ होता है। ख़ुशी, जिज्ञासा, अचरज और सहानुभूति भी वे उतनी ही तीव्रता से महसूस करते हैं। उनकी भावनाओं की दुनिया उनकी उम्र से बड़ी और उलझी हुई होती है।
यह हिस्सा GiftedKids.in का अपना है, क्योंकि यह हमारे सामाजिक ढाँचे की बात है।
हमारे यहाँ भावनाओं के लिए जगह कम है और नाम बहुत हैं। जो बच्चा रो देता है, वह “नाज़ुक” है। जो बात पकड़कर बैठ जाता है, वह “नाटक कर रहा है”। और जो लड़का रोता है, उसे सबसे पुराना वाक्य मिलता है — “लड़के रोते नहीं।”
फिर इसमें डर जुड़ जाता है। माता-पिता सोचने लगते हैं कि इतना भावुक बच्चा इस दुनिया में कैसे टिकेगा, competition कैसे झेलेगा। और उस डर से एक ग़लत कदम निकलता है — बच्चे को सख़्त बनाने की कोशिश।
एक बात और। भारत में बच्चे के दिन में ख़ाली समय बचा ही नहीं है — school, tuition, classes, फिर homework। जिस बच्चे को हर चीज़ ज़्यादा महसूस होती है, उसे उतरने के लिए वक़्त चाहिए। लगातार भरा हुआ दिन उसके लिए दोगुना भारी है।
Dr Inderbir Kaur Sandhu बताती हैं कि कुछ बच्चे छोटी सी ग़लती के बाद बार-बार माफ़ी माँगते रहते हैं। कुछ अच्छे नतीजों के बाद भी इस चिंता में रहते हैं कि उन्होंने माता-पिता को निराश किया।
और ऐसे बच्चे भी मिलते हैं जो किसी कहानी के पात्र के साथ हुई नाइंसाफ़ी पर, या किसी बच्चे को खेल से बाहर छोड़ दिए जाने पर परेशान हो जाते हैं।
उनका कहना साफ़ है — यह कमज़ोरी का संकेत नहीं है। यह अपनी उम्र से आगे की सहानुभूति है, और भावनाओं को गहराई से समझने की क्षमता है।
संवेदनशील बच्चों को “मज़बूत” बनाना ज़रूरी है।
संवेदनशीलता ताक़त बन सकती है, बशर्ते बच्चा भावनाओं को संभालना सीख ले। बहुत से अच्छे leader, innovator और कलाकार अपनी सफलता की वजह यही बताते हैं कि उन्हें लोगों और विचारों की गहरी परवाह थी।
Dr Inderbir Kaur Sandhu की सबसे काम की बात यही है — ऐसे बच्चे को सबसे बड़ा तोहफ़ा स्वीकार्यता है।
जिस बच्चे को यह भरोसा हो जाता है कि उसकी भावनाओं पर उसे टोका नहीं जाएगा, वह धीरे-धीरे सीख जाता है कि भावनाओं से डरने की ज़रूरत नहीं — उन्हें समझा और संभाला जा सकता है।
और जिस संवेदनशीलता को घर में जगह मिल जाती है, वह आगे चलकर सहानुभूति, टिकाऊपन और समझदारी बन जाती है। यही वह चीज़ है जिसे रिश्तेदार कमज़ोरी कह रहे थे।
ये सब अंग्रेज़ी में हैं। gifted education पर भरोसेमंद हिंदी सामग्री लगभग नहीं है — यही एक वजह है कि यह site बन रही है।
तेज़ भावनाएँ आना और चले जाना सामान्य है। समझने की ज़रूरत तब है जब बच्चा ज़्यादातर दिन घबराया हुआ लगे, जो काम उसे पसंद थे उनसे बचने लगे, या डाँट को अंदर ही अंदर पकड़कर बैठ जाए।
consultation के लिए संपर्क करेंconsultation Dr Inderbir की अपनी practice Mind Path के साथ होती है। GiftedKids.in clinical सवालों का जवाब नहीं दे सकता।