वह आलसी नहीं है। उसे ग़लती से डर लगता है।

gifted बच्चों में perfectionism — यह कहाँ से आता है, और घर में क्या बदला जा सकता है

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gifted — यानी वह बच्चा जिसका दिमाग़ औसत से अलग तरीक़े से काम करता है। यह अच्छे marks लाने वाला बच्चा नहीं है — यह सोचने का एक अलग तरीक़ा है।

GiftedKids.in की ओर से

बाहर से यह आलस जैसा दिखता है। जो बच्चा काम कर सकता है, वह बैठा रहता है। या शुरू करके page फाड़ देता है। या कहता है कि उसे इसमें दिलचस्पी नहीं — उसी चीज़ में, जिसमें पिछले हफ़्ते वह डूबा हुआ था। घर में सबसे पहला निष्कर्ष यही निकलता है — मन नहीं लगाता। लेकिन कई बार वजह उलटी होती है।

यह लेख GiftedKids.in ने भारतीय परिवारों के लिए लिखा है — किसी अंग्रेज़ी लेख का अनुवाद नहीं। इसका आधार Dr Inderbir Kaur Sandhu, PhD (Cambridge) का clinical काम है, जो भारत के बाहर की practice से आता है। भारतीय school, marks और परिवार का संदर्भ GiftedKids.in का अपना है। पूरा विवरण · उनका मूल अंग्रेज़ी लेख यहाँ

"कोशिश ही नहीं करता" — क्या यह सच में आलस है?

एक माँ ने कहा — "मेरा बेटा कोई भी काम शुरू नहीं करता जब तक उसे पक्का न हो कि वह perfect कर लेगा। ग़लती हो जाए तो परेशान हो जाता है, और कई बार बीच में छोड़ देता है। मुझे लगता था gifted बच्चे चुनौती पसंद करते हैं। यह क्या हो रहा है?"

यह सुनने में उलटा लगता है, लेकिन बहुत आम है। जो बच्चे बहुत कुछ कर सकते हैं, उनमें से कई अपने लिए बेहद ऊँचे पैमाने तय कर लेते हैं। जब वह पैमाना पूरा नहीं होता, तो एक छोटी सी ग़लती भी उन्हें उतनी बड़ी लगती है जितनी बड़ों को अंदाज़ा नहीं होता।

ऐसे बच्चे सीखने से नहीं डरते। वे ग़लत होने से डरते हैं। यह फ़र्क़ बहुत बड़ा है।

ऐसा क्यों होता है

शुरुआती सालों में ऐसे बच्चे नई चीज़ें जल्दी सीख लेते हैं। सब आसानी से हो जाता है, और आस-पास के बड़े उनकी तारीफ़ करते हैं — "कितना तेज़ है", "कितना होशियार है"।

फिर एक दिन असली मुश्किल काम सामने आता है। और अगर बच्चे ने अपनी पूरी पहचान इसी बात से जोड़ ली है कि वह "होशियार वाला बच्चा" है, तो ग़लती उसे अपनी क़ाबिलियत का सबूत नहीं, उसके ख़त्म होने का सबूत लगती है।

इसलिए कुछ बच्चे कोशिश करना ही बंद कर देते हैं। मुश्किल काम न छूना उन्हें उससे सुरक्षित लगता है, जिसमें पता चल जाए कि वे पहली बार में सफल नहीं हुए।

भारत में हम यह डर ख़ुद बना देते हैं

यह हिस्सा GiftedKids.in का अपना है, क्योंकि यह हमारे यहाँ की बनाई हुई समस्या है।

हमारे घरों में तारीफ़ अक्सर सिर्फ़ नतीजे की होती है। 98 आए तो सवाल यह नहीं होता कि क्या सीखा — सवाल होता है, "2 कहाँ गए?" रिश्तेदार पूछते हैं rank क्या है। पड़ोसी के बच्चे का percentage पहले से मालूम होता है।

बच्चा इससे एक साफ़ नतीजा निकालता है: मुझसे प्यार इसलिए है कि मैं ग़लती नहीं करता। यह किसी ने कहा नहीं होता, लेकिन वह यही समझता है।

अगर घर में ग़लती की कोई जगह नहीं है, तो बच्चा ग़लती छिपाना सीखता है — सुधारना नहीं। और जो बच्चा ग़लती छिपा रहा है, वह सीख नहीं रहा।

board exam का दबाव इसे और तेज़ कर देता है। जहाँ हर test को "career तय करने वाला" बना दिया जाता है, वहाँ एक wrong answer की क़ीमत बच्चे के मन में असली से कई गुना बड़ी हो जाती है।

assessment room में जो दिखता है

बरसों के काम में ऐसे बच्चे कई बार मिले जो एक सवाल ग़लत होने पर रो पड़े — जबकि पूरे assessment में उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा था। कुछ बच्चे मुश्किल सवाल शुरू करने से पहले माफ़ी माँगते हैं, इस डर से कि वे माता-पिता को निराश कर देंगे।

जब उन्हें यह समझ आता है कि assessment उन्हें आँकने के लिए नहीं, यह देखने के लिए है कि वे कैसे सोचते हैं — तब वे खुल जाते हैं और डटे रहने को तैयार हो जाते हैं।

इससे एक बात साफ़ होती है: आत्मविश्वास सिर्फ़ सफलता से नहीं बनता। वह तब बनता है जब बच्चा जान जाता है कि ग़लती सीखने का सामान्य और ज़रूरी हिस्सा है।

घर में क्या बदला जा सकता है

भ्रम

gifted बच्चों को हर काम बिना मेहनत perfect कर लेना चाहिए।

हक़ीक़त

उन्हें भी संघर्ष करने, अभ्यास करने और सँभलना सीखने के मौक़े चाहिए। ग़लती से निपटना सीखना उतना ही ज़रूरी है जितना दिमाग़ का तेज़ होना।

GiftedKids.in की बात

ऐसे बच्चों को हम जो सबसे क़ीमती चीज़ दे सकते हैं, वह है — अपूर्ण होने की इजाज़त

उनकी क्षमता इस बात से नहीं नापी जाती कि उन्होंने कितनी कम ग़लतियाँ कीं। वह इस बात से नापी जाती है कि मुश्किल आने पर भी वे खोजते रहे, सवाल पूछते रहे, बढ़ते रहे।

जिस दिन बच्चा समझ जाता है कि ग़लती रुकावट नहीं, सीढ़ी है — उस दिन वह ज़्यादा आत्मविश्वास से सीखता है, और ज़्यादा ख़ुश रहता है।

ऊपर से लिया गया photo — एक बच्चा ज़मीन पर लेटकर colouring कर रहा है, आस-पास कई पूरी की हुई sheets बिखरी हैं

और गहराई से पढ़ने के लिए

ये सब अंग्रेज़ी में हैं। gifted education पर भरोसेमंद हिंदी सामग्री लगभग नहीं है — यही एक वजह है कि यह site बन रही है।

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जब कोशिश न करना आदत बन जाए

कभी-कभार झुँझलाना सामान्य है। लेकिन अगर बच्चा वे काम भी छोड़ने लगे जो वह कर सकता है, या एक ग़लती से पूरी दोपहर ख़राब हो जाए, तो ज़ोर लगाने से बेहतर है इसे समझना।

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consultation Dr Inderbir की अपनी practice Mind Path के साथ होती है। GiftedKids.in clinical सवालों का जवाब नहीं दे सकता।