मेहनत की कमी नहीं है। चुनौती की कमी है।

होशियार बच्चा school में क्यों पिछड़ जाता है — और एक और tuition इसका जवाब क्यों नहीं है

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gifted — यानी वह बच्चा जिसका दिमाग़ औसत से अलग तरीक़े से काम करता है। यह अच्छे marks लाने वाला बच्चा नहीं है — यह सोचने का एक अलग तरीक़ा है।

GiftedKids.in की ओर से

report card गिरना शुरू होता है और वजहें फ़ौरन तैयार हो जाती हैं। मन नहीं लगाता। लापरवाह है। कहा हुआ सुनता नहीं। एक tuition और लगा दी जाती है, फिर तीसरी — क्योंकि "और घंटे" ही एक चीज़ है जिसे बढ़ाना हम सब जानते हैं। जो कोई नहीं देखता, वह यह है कि बच्चा ऊब चुका है।

यह लेख GiftedKids.in ने भारतीय परिवारों के लिए लिखा है — किसी अंग्रेज़ी लेख का अनुवाद नहीं। इसका आधार Dr Inderbir Kaur Sandhu, PhD (Cambridge) का clinical काम है, जो भारत के बाहर की practice से आता है। भारतीय school, marks और परिवार का संदर्भ GiftedKids.in का अपना है। पूरा विवरण · उनका मूल अंग्रेज़ी लेख यहाँ

"इतना समझदार है, फिर school में क्या दिक़्क़त है?"

एक माता-पिता ने पूछा — "मेरा बच्चा इतना सक्षम है, फिर school इतना मुश्किल क्यों हो रहा है?"

बहुत लोग मान लेते हैं कि gifted बच्चों को school अपने आप पसंद आएगा और वे अच्छा करेंगे। हमेशा ऐसा नहीं होता। बरसों में ऐसे कई बच्चे मिले जिन्हें सीखना बहुत पसंद है और school पसंद नहीं।

यह फ़र्क़ बहुत ज़रूरी है। सीखना और schooling एक ही अनुभव नहीं होते।

एक बच्चे को science, इतिहास या समस्या सुलझाने में गहरी दिलचस्पी हो सकती है, और उसी बच्चे को दोहराव वाला काम, धीमी रफ़्तार या वह काम जिसमें उसे कोई अर्थ न दिखे — मुश्किल लग सकता है।

क्षमता होने से चुनौतियाँ ख़त्म नहीं हो जातीं। gifted बच्चे भी बढ़ रहे बच्चे ही हैं।

संघर्ष की वजहें क्या होती हैं

ऐसे बच्चे कई कारणों से पिछड़ सकते हैं।

कुछ तब ऊब जाते हैं जब उन्हें पर्याप्त चुनौती नहीं मिलती। कुछ में perfectionism आ जाती है और वे उन कामों से बचने लगते हैं जिनमें सफलता पक्की न हो।

और कुछ बच्चों में तर्क करने की क्षमता बहुत आगे होती है, पर काम व्यवस्थित करना, योजना बनाना या ध्यान बनाए रखना पीछे रह जाता है। यही बात बड़ों को उलझा देती है — बच्चा कुछ जगहों पर बहुत सक्षम दिखता है और कुछ में लड़खड़ाता है।

भारत में हम इसका जवाब ग़लत जगह ढूँढ़ते हैं

यह हिस्सा GiftedKids.in का अपना है।

हमारे यहाँ marks गिरने पर एक ही हल निकाला जाता है — और पढ़ाई, और घंटे, और tuition। क्योंकि हमारे पास सिर्फ़ यही एक lever है जिसे खींचना सब जानते हैं।

लेकिन tuition उस बच्चे के लिए बनी है जिसे दोहराने से फ़ायदा होता है। जो बच्चा पहली बार में समझ चुका है और अब ऊब रहा है, उसके लिए वही चीज़ फिर से सुनना हल नहीं — सज़ा है। ऊब से पैदा हुई समस्या पर हम और ऊब लगा देते हैं और हैरान होते हैं कि सुधार क्यों नहीं हुआ।

बच्चे से यह पूछना कि "इतना होशियार है तो कर क्यों नहीं लेता" उतना ही बेकार है जितना किसी भूखे आदमी से पूछना कि तुम्हारे पास हाथ तो हैं। सवाल क्षमता का नहीं है।

दूसरी भारतीय बात — तुलना। "उसके भाई ने 94 लाए थे", "पड़ोसी का बच्चा topper है"। यह प्रेरणा नहीं देती। यह बच्चे को यह सिखाती है कि नाकाम होने से बेहतर कोशिश ही न करना है।

और तीसरी — board exam का साया। जहाँ हर test को ज़िंदगी तय करने वाला बता दिया जाता है, वहाँ ग़लती की क़ीमत इतनी बड़ी लगने लगती है कि शुरू करना ही मुश्किल हो जाता है।

assessment room में जो दिखता है

एक बात बार-बार दोहराई जाती है। बड़े लोग पूछते हैं — "अगर यह बच्चा इतना होशियार है, तो कर क्यों नहीं लेता?"

जवाब यह है कि क्षमता चुनौतियाँ नहीं हटाती। ऐसे बच्चों को भी मार्गदर्शन चाहिए, सहारा चाहिए, और सँभलने, डटे रहने और पढ़ने के असरदार तरीक़े सीखने के मौक़े चाहिए।

संघर्ष के पीछे की वजह समझना उससे बहुत ज़्यादा उपयोगी है, बजाय यह मान लेने के कि बच्चा आलसी है या मेहनत नहीं कर रहा।

घर में क्या बदला जा सकता है

भ्रम

gifted बच्चे अपने आप कामयाब हो जाएँगे।

हक़ीक़त

उन्हें भी मार्गदर्शन, हौसला और ऐसा माहौल चाहिए जिसमें उनकी क्षमता खुल सके।

GiftedKids.in की बात

इस काम का सबसे ज़रूरी सबक़ यह है — क्षमता अपने आप कामयाबी नहीं बन जाती।

ऐसे बच्चों को लगातार दबाव की ज़रूरत नहीं है। उन्हें ऐसे बड़े चाहिए जो उनकी मज़बूती समझें, उनकी दिक़्क़त पहचानें, और उन्हें आगे बढ़ने के तरीक़े सिखाएँ।

कामयाबी इस बात से तय नहीं होती कि बच्चे में कितनी क्षमता है। वह इस बात से तय होती है कि उस क्षमता को कैसे सँवारा गया।

एक बच्चा घर पर मेज़ पर बैठा खिड़की से बाहर देख रहा है, सामने खुली copy और pencil रखी है

और गहराई से पढ़ने के लिए

ये सब अंग्रेज़ी में हैं। gifted education पर भरोसेमंद हिंदी सामग्री लगभग नहीं है — यही एक वजह है कि यह site बन रही है।

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जब और घंटे जवाब नहीं हैं

अगर बच्चा सक्षम है और marks फिर भी गिर रहे हैं, तो एक और tuition से यह ठीक कम ही होता है। यह समझना कि फ़ासला कहाँ से खुला — वही नतीजा बदलता है।

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consultation Dr Inderbir की अपनी practice Mind Path के साथ होती है। GiftedKids.in clinical सवालों का जवाब नहीं दे सकता।