marks बताते हैं क्या सीखा — यह नहीं कि वह कैसे सोचता है

bright बच्चा और gifted बच्चा — फ़र्क़ कहाँ है, और यह जानना क्यों ज़रूरी है

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gifted — यानी वह बच्चा जिसका दिमाग़ औसत से अलग तरीक़े से काम करता है। यह अच्छे marks लाने वाला बच्चा नहीं है, और यह कोई तारीफ़ नहीं है — यह सोचने का एक अलग तरीक़ा है।

GiftedKids.in की ओर से

भारत में बच्चे के बारे में हर सवाल का जवाब एक number होता है। percentage, rank, percentile। पूरा system इसी एक पैमाने पर सहमत है, इसलिए यही हर बात का जवाब बन जाता है — उन सवालों का भी जिनके लिए यह कभी बना ही नहीं था। अगर आपको लगने लगा है कि आपका बच्चा जिस तरह सोचता है, वह report card पर दिख ही नहीं रहा — तो यह पढ़िए।

यह लेख GiftedKids.in ने भारतीय परिवारों के लिए लिखा है — किसी अंग्रेज़ी लेख का अनुवाद नहीं। इसका आधार Dr Inderbir Kaur Sandhu, PhD (Cambridge) का clinical काम है, जो भारत के बाहर की practice से आता है। भारतीय school, marks और परिवार का संदर्भ GiftedKids.in का अपना है। पूरा विवरण · उनका मूल अंग्रेज़ी लेख यहाँ

"मेरा बच्चा हमेशा first आता है — तो वह gifted है?"

यह सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है, और इसकी वजह भी साफ़ है। marks दिखते हैं। marks नापे जा सकते हैं। marks की तुलना पड़ोसी के बच्चे से की जा सकती है। जो चीज़ नापी नहीं जा सकती, उसके बारे में बात करना मुश्किल हो जाता है।

लेकिन जवाब सीधा नहीं है। assessment के काम में लगातार यही दिखता है कि सबसे अच्छे marks लाने वाले कई बच्चे bright और मेहनती होते हैं — उन्हें school का तरीक़ा सूट कर जाता है। और उसी वक़्त कुछ बेहद gifted बच्चे बोर हो रहे होते हैं, कम marks ला रहे होते हैं, या ग़लत समझे जा रहे होते हैं। उनकी असली क्षमता तब दिखती है जब exam results से आगे देखा जाता है।

report card बताता है कि बच्चे ने क्या सीखा। यह हमेशा नहीं बताता कि वह कैसे सीखता है।

bright और gifted — फ़र्क़ कहाँ है

bright बच्चा वह है जो पढ़ा दिए जाने के बाद जल्दी सीख लेता है। gifted बच्चा आमतौर पर यह जानना चाहता है कि क्यों

वह ऐसे सवाल पूछता है जिनकी उम्मीद नहीं थी। वह उन चीज़ों को जोड़ देता है जो जुड़ी हुई नहीं लगतीं। और जब बाक़ी class आगे बढ़ चुकी होती है, तब भी वह उसी idea में उलझा रहता है। वह सिर्फ़ तेज़ नहीं सीख रहा — वह अलग तरीक़े से सोच रहा है।

इसलिए giftedness academic performance से बहुत बड़ी चीज़ है। यह इस बात से जुड़ी है कि बच्चा कैसे तर्क करता है, समस्या कैसे सुलझाता है, नए विचारों को कैसे लेता है, और दुनिया को कैसे महसूस करता है।

भारत में यह सवाल ज़्यादा उलझ जाता है

यह हिस्सा GiftedKids.in का अपना है, क्योंकि यह भारत की अपनी समस्या है।

हमारे यहाँ पूरा ढाँचा एक ही सवाल पर टिका है — कितने marks आए। class में 45 बच्चे हैं, syllabus तय है, और board exam सिर पर है। ऐसे में teacher के पास यह देखने का वक़्त ही नहीं होता कि कोई बच्चा किस तरह सोच रहा है। जो बच्चा चुपचाप लिखकर 92% ले आता है, वह "अच्छा बच्चा" है। जो बच्चा सवाल पूछता है, बहस करता है, और 68% लाता है, वह "ध्यान नहीं देता"।

फिर tuition शुरू होती है। और tuition उस बच्चे के लिए बनी है जिसे दोहराने से फ़ायदा होता है — उस बच्चे के लिए नहीं जो पहली बार में समझ चुका है और अब ऊब रहा है। कई gifted बच्चों के लिए tuition हल नहीं, एक और सज़ा बन जाती है।

अगर आपके बच्चे के marks उसकी समझ से मेल नहीं खा रहे, तो यह मान लेना ज़रूरी नहीं कि वह मेहनत नहीं कर रहा। यह भी हो सकता है कि उसे कभी उस level पर सोचने का मौक़ा ही न मिला हो जिस level पर वह सोच सकता है।

एक बात जो बार-बार दिखती है

assessment के लिए भेजे गए एक बच्चे के बारे में teachers ने लिखा था कि वह लापरवाह है और उसका काम में मन नहीं लगता। copy गंदी थी, homework अधूरा रहता था, और वह ध्यान भटकाता था।

उसी बच्चे ने assessment में ऐसे सवाल हल किए जो उसने पहले कभी देखे नहीं थे — और बहुत मौलिक तरीक़े से हल किए। दिक़्क़त कभी क्षमता की नहीं थी। उसने बरसों अपनी क्षमता से बहुत नीचे के level पर काम किया था।

ऐसे मामले याद दिलाते हैं कि किसी बच्चे पर जल्दी राय बना लेना ख़तरनाक है। कभी-कभी giftedness boredom, perfectionism, anxiety या ऐसे व्यवहार के पीछे छिपी रहती है जिसे बड़े लोग ग़लत समझ लेते हैं।

माता-पिता क्या कर सकते हैं

भ्रम

gifted बच्चे हमेशा class में first आते हैं।

हक़ीक़त

बहुत से नहीं आते। marks इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि बच्चे की रुचि कितनी है, उसे मौक़े कैसे मिले, उसकी भावनात्मक स्थिति कैसी है, वह अपना काम कैसे organise करता है — और सबसे बड़ी बात, उसे कभी उतनी कठिन चुनौती मिली या नहीं जितनी उसका दिमाग़ माँगता है।

GiftedKids.in की बात

सबसे उपयोगी सवाल "क्या मेरा बच्चा gifted है?" नहीं है। ज़्यादा काम का सवाल यह है — इस बच्चे को आगे बढ़ने के लिए क्या चाहिए?

report card बताता है कि उसने क्या सीखा। यह नहीं बताता कि वह कैसे सीखता है। जिस दिन माता-पिता का ध्यान label पीछा करने से हटकर यह समझने पर आ जाता है कि उनका बच्चा कैसे सोचता है, उस दिन घर की बातचीत बदल जाती है। अपेक्षाएँ ज़्यादा सेहतमंद हो जाती हैं। और बच्चे को वह बनने का मौक़ा मिलता है जो वह असल में बन सकता है।

यही giftedness पहचानने का सही मक़सद है — किसी को ऊँचा साबित करना नहीं।

एक बड़ी बहन दो छोटे बच्चों को picture book पढ़कर सुना रही है

और गहराई से पढ़ने के लिए

ये सब अंग्रेज़ी में हैं। gifted education पर भरोसेमंद हिंदी सामग्री लगभग नहीं है — यही एक वजह है कि यह site बन रही है।

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अगर आपका बच्चा उससे ज़्यादा समझदार लगता है जितना उसके results बताते हैं, या यह फ़ासला बढ़ता जा रहा है, तो अंदाज़ा लगाने से बेहतर है इसे ठीक से समझना।

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consultation Dr Inderbir की अपनी practice Mind Path के साथ होती है। GiftedKids.in clinical सवालों का जवाब नहीं दे सकता।