जो बच्चा documentary घंटों देखता है, वही दस सवाल लिखने पर अड़ जाता है — ऐसा क्यों
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gifted — यानी वह बच्चा जिसका दिमाग़ औसत से अलग तरीक़े से काम करता है। यह अच्छे marks लाने वाला बच्चा नहीं है — यह सोचने का एक अलग तरीक़ा है।
GiftedKids.in की ओर से
हमारे यहाँ practice का मतलब एक गिनती है। दस बार लिखो। पूरा page फिर से करो। दो और sample paper निकालो। इसलिए जो बच्चा दोहराने से पीछे हटता है, उसे ऊबा हुआ नहीं समझा जाता — लापरवाह समझा जाता है।
यह लेख GiftedKids.in ने भारतीय परिवारों के लिए लिखा है — किसी अंग्रेज़ी लेख का अनुवाद नहीं। इसका आधार Dr Inderbir Kaur Sandhu, PhD (Cambridge) का clinical काम है, जो भारत के बाहर की practice से आता है। भारतीय school, marks और परिवार का संदर्भ GiftedKids.in का अपना है। पूरा विवरण · उनका मूल अंग्रेज़ी लेख यहाँ।
यह शिकायत बहुत सुनने में आती है। बच्चा documentary घंटों देख लेता है, अपनी उम्र से आगे की किताबें पढ़ लेता है, सवालों की लाइन लगा देता है — और उसी बच्चे से दस मिलते-जुलते सवाल या spelling का अभ्यास कराना रोज़ की लड़ाई बन जाता है।
माता-पिता उलझ जाते हैं, क्योंकि दोनों बातें एक साथ सच नहीं लगतीं।
सीखना और दोहराना एक ही चीज़ नहीं हैं। यही पूरी बात की जड़ है।
ऐसे बच्चे नई बात दो-तीन उदाहरणों में पकड़ लेते हैं। जिस पल उन्हें अंदर की तरकीब समझ आ जाती है, उसी पल बाक़ी नौ सवाल उनके लिए बेमतलब हो जाते हैं।
उन्हें नयापन, चुनौती और मतलब खींचता है — दोहराव नहीं। यह आलस नहीं है। उनका दिमाग़ काम माँग रहा है, और उसे वह काम नहीं मिल रहा।
यह हिस्सा GiftedKids.in का अपना है, क्योंकि यह हमारे ढाँचे की बात है।
हमारे यहाँ अभ्यास नापने का एक ही पैमाना है — कितनी बार। copy भरी हुई दिखनी चाहिए। teacher को गिनती चाहिए, माता-पिता को सबूत चाहिए। और जिस बच्चे की copy अधूरी है, उसका नाम पड़ जाता है — “लिखने में आलस करता है”।
फिर “दस बार लिखो” सज़ा भी बन जाता है। जो चीज़ सीखने का तरीक़ा थी, वह डाँट का औज़ार बन जाती है। एक बार यह जुड़ाव बन गया, तो बच्चा अभ्यास से और दूर भागता है।
एक और भारतीय उलझन: बहुत से घरों में इसका इलाज tuition है। लेकिन tuition उस बच्चे के लिए बनी है जिसे दोहराने से फ़ायदा होता है। जो बच्चा पहली बार में समझ चुका है, उसके लिए वह उसी काम का दूसरा दौर है।
Dr Inderbir Kaur Sandhu बताती हैं कि ऐसे बच्चे मुश्किल puzzle और नए विचारों में डूब जाते हैं, लेकिन उसी skill को दोहराने वाली worksheet से ऊब जाते हैं।
assessment के दौरान यह और साफ़ दिखता है — अनजाने तर्क वाले सवाल सामने आते ही वे जाग जाते हैं, और जैसे ही काम का अंदाज़ा लगने लगता है, दिलचस्पी उतर जाती है। तेज़ दिमाग़ वाले बच्चों में यह बहुत आम है।
शोध यह भी बताता है कि ऐसे बच्चे भीतरी प्रेरणा से चलते हैं। जहाँ सीखने में मतलब, चुनौती और अपने ढंग से सोचने की जगह होती है, वहाँ वे ज़्यादा जुड़ते हैं — उस काम में नहीं जो पहले से आता है।
जो gifted बच्चा दोहराने वाला काम नहीं करता, वह आलसी है।
ऐसे बच्चों को भी टिके रहना सीखना पड़ता है, बाक़ी बच्चों की तरह। साथ ही उन्हें ऐसा काम भी चाहिए जो उनके दिमाग़ के स्तर का हो।
Dr Inderbir Kaur Sandhu की सबसे काम की बात यही है — मक़सद routine काम हटाना नहीं है।
तेज़ बच्चों को भी टिकाऊपन और पढ़ने की आदत बनानी पड़ती है, और महारत के लिए अभ्यास लगता ही है। समझना यह है कि दोहराव उसे क्यों चुभता है, और साथ ही उसे यह भी समझाना है कि हर चीज़ पहली बार में पूरी नहीं होती।
संतुलन घर पर बनता है। ज़रूरी अभ्यास, उतना ही जितना ज़रूरी है — और उसके साथ कुछ ऐसा जो उसकी जिज्ञासा को खुली जगह दे।
ये सब अंग्रेज़ी में हैं। gifted education पर भरोसेमंद हिंदी सामग्री लगभग नहीं है — यही एक वजह है कि यह site बन रही है।
दोहराने वाले काम से चिढ़ना आम बात है। ध्यान देने की ज़रूरत तब है जब यह लड़ाई रोज़ की हो जाए, marks उस समझ से नीचे जाने लगें जो बच्चे में साफ़ दिखती है, या बच्चा उस विषय को “अपने बस का नहीं” कहने लगे जिसमें वह असल में अच्छा है।
consultation के लिए संपर्क करेंconsultation Dr Inderbir की अपनी practice Mind Path के साथ होती है। GiftedKids.in clinical सवालों का जवाब नहीं दे सकता।